हजारीबाग । हजारीबाग जिले के इचाक के अंचलाधिकारी पर जमीन विवाद में पक्षपातपूर्ण निर्णय देने का गंभीर आरोप लगाया गया है। ग्राम परासी निवासी सुनील वैध ने मुख्यमंत्री को लिखे आवेदन में दावा किया है कि सीओ ने जमीन विवाद के मामले में रिश्वत नहीं देने पर एकतरफा फैसला सुनाया।
सुनील वैध के अनुसार, उनके और शिवटहल वैध (प्रथम पक्ष) के बीच भूमि विवाद से संबंधित वाद संख्या 10/2024-25 अंचल न्यायालय में लंबित था। दोनों पक्षों से जमीन के दस्तावेज मांगे गए थे, जिन्हें उन्होंने समय पर प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि उनके परिवार के सदस्य नंदु वैध और गणपत वैध सगे भाई हैं तथा दोनों के वंशज अपने-अपने हिस्से की भूमि पर वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। इसके बावजूद, सीओ की ओर से जारी जांच रिपोर्ट में उनके कब्जे का उल्लेख नहीं किया गया और पारिवारिक संबंधों को भी नकार दिया गया।
आवेदक का आरोप है कि यह रिपोर्ट एकतरफा तरीके से तैयार की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब रामजी प्रसाद गुप्ता धनवार अंचल में पदस्थापित थे, तब वर्ष 2020 में उन्हें एसीबी की टीम ने ₹5000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था, बावजूद इसके उन्हें पदोन्नति देकर इचाक में पदस्थापित किया गया।
वहीं, इस संबंध में इचाक अंचलाधिकारी रामजी प्रसाद गुप्ता ने लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि “जो निर्णय दिया गया है, वह पूरी तरह तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायसंगत है। यदि किसी पक्ष को निर्णय पर आपत्ति है, तो वह माननीय न्यायालय में अपील कर सकता है।” उन्होंने रिश्वतखोरी और पक्षपात के सभी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती गई है।
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