रांची। साइबर अपराधियों की नजर में आम और खास कोई भी सुरक्षित नहीं है। इसका ताजा उदाहरण तब सामने आया, जब केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ को भी साइबर फ्रॉड का शिकार बनाने की कोशिश की गई। हालांकि उनकी सूझबूझ और सतर्कता से यह बड़ी ठगी नाकाम हो गई।
साइबर अपराध पर आयोजित एक सेमिनार में संजय सेठ ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया, जिसमें उनके दिल्ली में रह रहे बड़े भाई को निशाना बनाकर ठगी की कोशिश की जा रही थी। कॉल करने वाले ने यहां तक धमकी दी कि अगर उन्होंने इस बारे में किसी को बताया तो उनका मंत्री पद भी चला जाएगा।
मंत्री सेठ ने बताया कि उन्हें संदेह होते ही उन्होंने उस कॉल को तुरंत कॉन्फ्रेंस कॉल पर झारखंड के एसएसपी से जोड़ दिया। पुलिस अधिकारी की आवाज सुनते ही साइबर ठग घबरा गया और तुरंत कॉल काटकर फरार हो गया।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि साइबर ठग बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे हैं और वीडियो कॉल, व्हाट्सएप फोटो, ईमेल और फर्जी लिंक के जरिए लोगों को जाल में फंसाते हैं। अनजान नंबर से आने वाले किसी भी वीडियो कॉल, लिंक या फाइल को खोलने से बचना चाहिए, नहीं तो मिनटों में बैंक खाता खाली हो सकता है।
संजय सेठ ने कहा कि झारखंड के एमएसएमई सेक्टर में डिजिटल अरेस्ट और एआई आधारित साइबर धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सीमित संसाधन, तकनीकी जानकारी की कमी और असुरक्षित नेटवर्क के कारण छोटे उद्यमी साइबर अपराधियों के आसान शिकार बन रहे हैं, जबकि एमएसएमई देश की आर्थिक रीढ़ है।
इस कार्यक्रम का आयोजन बीएसएनएल झारखंड और साइबर पीस फाउंडेशन की ओर से रांची में किया गया था। साइबर पीस के संस्थापक और ग्लोबल अध्यक्ष मेजर विनीत कुमार ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड होने के बाद पहला आधा घंटा बेहद अहम होता है। यदि इस दौरान शिकायत नहीं की गई तो नुकसान बढ़ सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ठगी होने पर तुरंत 1930 टोल फ्री नंबर या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, ताकि गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के जरिए बैंक खाते को तुरंत फ्रीज कराया जा सके।
बीएसएनएल झारखंड के सीजीएम विपुल अग्रवाल ने भी सुरक्षित नेटवर्क और डिजिटल हाइजीन पर केस स्टडी के जरिए लोगों को जागरूक किया।
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